धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला, UKSSSC से छीन PSC के हवाले 7000 भर्तियां, हरीश रावत भड़के ‘PSC के बस का भी है?

देहरादून. उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तहत भर्तियों में घोटाला सामने आने के बाद अब इस संस्था की पांच परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. इन्हें अब राज्य लोक सेवा आयोग करवाएगा. उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में जो बड़े फैसले लिये गए, उनमें एक सैनिक स्कूलों के विस्तार से जुड़ा फैसला भी है. लेकिन सबसे बड़ा कदम कैबिनेट ने यही उठाया कि करीब 7000 पदों के लिए भर्तियों का ज़िम्मा अब पीएससी को सौंप दिया गया है और इन भर्तियों के लिए पीएससी जल्द ही कैलेंडर जारी करने की कवायद कर सकती है.

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का पेपर लीक मामला उत्तराखंड के इतिहास में सबसे बडे़ भर्ती घोटाले के रूप में दर्ज होता जा रहा है. शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की मीटिंग में UKSSSC का मुद्दा गरमाया रहा. कैबिनेट ने फैसला लिया कि UKSSSC के अधीन सभी भर्ती परीक्षाओं को लोक सेवा आयोग को दे दिया जाए. लिहाज़ा UKSSSC के अधीन 23 कैटेगरी की करीब 7000 पदों की भर्तियां लोक सेवा आयोग को सौंप दी गई. इनमें कुछ ऐसी भर्तियां हैं जिनमें एग्जाम हो चुका है, कुछ भर्तियां ऐसी हैं जिनका विज्ञापन निकल चुका है लेकिन एग्जाम नहीं हुआ. कुछ में एग्जाम भी हो चुके हैं, लेकिन रिजल्ट आउट नहीं हुआ.

इन्हीं भर्तियों में पांच कैटेगरी की 770 पदों की भर्तियां ऐसी थीं, जिनमें एग्जाम हो चुके थे सिर्फ रिजल्ट आउट होना बाकी था. कैबिनेट ने वाहन चालक, अनुदेशक, मत्स्य निरीक्षक, पुलिस रैंकर्स, मुख्य आरक्षी दूरसंचार कैटेगरी की इन भर्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया है. इनकी परीक्षाएं अब लोक सेवा आयोग नए सिरे से कराएगा. जिन कैंडिडेट ने पहले फॉर्म फीस जमा की है, उनसे दोबारा फीस नहीं ली जाएगी.

कैबिनेट के फैसले पर हरीश रावत ने उठाए सवाल

पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत शुक्रवार को रामनगर पहुंचे तो कैबिनेट मीटिंग के उस फैसले पर सवाल खड़े किए, जिसमें UKSSSC की 5 भर्तियों को निरस्त कर दिया गया. रावत ने कहा कि जिन युवाओं ने मेहनत के बल पर नियुक्ति पाई, उनके साथ यह अन्याय है. अब उनके सामने ओवर ऐज भी होने की स्थिति भी खड़ी हो सकती है. सरकार को ध्यान देना चाहिए. उन्होंने विधानसभा में हुई बैकडोर भर्तियों पर भी पुराना स्टैंड कायम रखते हुए कहा कि नियुक्तियों को प्रभावित करने वाले नेताओं के खास लोगों की भर्तियां तो रद्द की ही जानी चाहिए क्योंकि इनमें नैतिकता नहीं है.